एक उपहार...
“मेरे जन्मदिन का सबसे सच्चा उपहार”
मुझे पता है
शायद मैं तुम्हारे लिए पर्याप्त नहीं हूँ।
शायद मेरे होने से
तुम्हारी दुनिया में
कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
बहुत कोशिश की मैंने
अपने आपको समझाने की—
कि शायद एक दिन
मैं भी तुम्हारी पहली प्राथमिकता बन जाऊँगी,
पर अब समझ आ गया है
कुछ जगहें होती हैं
जहाँ चाहकर भी
अपना नाम नहीं लिखा जा सकता।
इसलिए आज,
अपने ही जन्मदिन पर
मैं तुम्हें एक अजीब-सा उपहार देती हूँ—
मैं तुम्हें मुझसे दूर होने की आज़ादी देती हूँ।
हाँ,
शायद मैं तुम्हारी प्रेमिका
कभी नहीं बन पाऊँगी,
और शायद
हमारा मिलना भी
नसीब की कहानी में
बस एक छोटा-सा भ्रम था।
तो आज
मैं तुम्हें आज़ाद करती हूँ
अपने प्रेम से।
और साथ ही
मैं खुद को भी मुक्त करती हूँ
हर उस उम्मीद से
हर उस ख्वाहिश से
जो मैंने तुम्हारे नाम पर
अपने दिल में बो दी थी।
शायद वे इच्छाएँ
कभी फूल नहीं बन सकती थीं।
इसलिए
आज इस जन्मदिन पर
मैं उन्हें वहीं छोड़ देती हूँ
जहाँ वे अधूरी रह गई थीं।
बस जाते-जाते
इतना ही कहूँगी—
ख़याल रखना।
क्योंकि कभी
किसी जन्मदिन की रात
एक लड़की ने
अपने हिस्से का प्रेम
अपने ही दिल में दफना दिया था,
और उसी को
तुम्हारे लिए
दुआ बना दिया। 🌙
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