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Showing posts from March, 2026

बेला , माधव और मुलाक़ात

उदयपुर की शामों में एक अजीब-सी शांति होती है। जैसे शहर पूरे दिन की हलचल के बाद धीरे-धीरे सांस ले रहा हो। उस शाम Fateh Sagar Lake के किनारे हवा हल्की ठंडी थी और झील का पानी आसमान के रंग अपने अंदर समेटे शांत पड़ा था। बेला वहाँ किसी योजना से नहीं आई थी। वह अक्सर तब वहाँ चली आती थी जब मन में बहुत सारे ख्याल होते थे। उसे हमेशा लगता था कि इस दुनिया में कहीं कोई ऐसा इंसान होगा जो उसे बिना ज्यादा शब्दों के समझ सके। उधर उसी शाम माधव भी वहाँ आया था। उसे फोटोग्राफी से प्रेम था—पर वह सिर्फ जगहों की नहीं, पलों की तस्वीरें लेता था। उसी समय उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी। वह रेलिंग के पास खड़ी झील को देख रही थी। हवा उसके बालों को हल्का-सा उड़ा रही थी और उसके चेहरे पर एक शांत-सी उदासी थी। माधव ने कैमरा उठाया। एक पल सोचा… और चुपचाप उसकी तस्वीर ले ली। क्लिक की हल्की आवाज़ हुई। बेला मुड़ी। “तुमने… मेरी फोटो ली?” उसने पूछा। माधव मुस्कुराया। “हाँ… क्योंकि कुछ पल पूछने से पहले ही गुजर जाते हैं।” उसने कैमरे की स्क्रीन उसकी तरफ बढ़ा दी। बेला ने तस्वीर देखी। उस तस्वीर में वह खुद को वैसा देख रही थी जैसे शायद उसने ख...

एक उपहार...

 “मेरे जन्मदिन का सबसे सच्चा उपहार” मुझे पता है शायद मैं तुम्हारे लिए पर्याप्त नहीं हूँ। शायद मेरे होने से तुम्हारी दुनिया में कोई खास फर्क नहीं पड़ता। बहुत कोशिश की मैंने अपने आपको समझाने की— कि शायद एक दिन मैं भी तुम्हारी पहली प्राथमिकता बन जाऊँगी, पर अब समझ आ गया है कुछ जगहें होती हैं जहाँ चाहकर भी अपना नाम नहीं लिखा जा सकता। इसलिए आज, अपने ही जन्मदिन पर मैं तुम्हें एक अजीब-सा उपहार देती हूँ— मैं तुम्हें मुझसे दूर होने की आज़ादी देती हूँ। हाँ, शायद मैं तुम्हारी प्रेमिका कभी नहीं बन पाऊँगी, और शायद हमारा मिलना भी नसीब की कहानी में बस एक छोटा-सा भ्रम था। तो आज मैं तुम्हें आज़ाद करती हूँ अपने प्रेम से। और साथ ही मैं खुद को भी मुक्त करती हूँ हर उस उम्मीद से हर उस ख्वाहिश से जो मैंने तुम्हारे नाम पर अपने दिल में बो दी थी। शायद वे इच्छाएँ कभी फूल नहीं बन सकती थीं। इसलिए आज इस जन्मदिन पर मैं उन्हें वहीं छोड़ देती हूँ जहाँ वे अधूरी रह गई थीं। बस जाते-जाते इतना ही कहूँगी— ख़याल रखना। क्योंकि कभी किसी जन्मदिन की रात एक लड़की ने अपने हिस्से का प्रेम अपने ही दिल में दफना दिया था, और उसी को ...