आज का दर्द
उसे कॉल किया…
पर मैं तो पहले से ही ब्लॉक में थी।
शायद उसके जीवन में भी…
और अब उसके फ़ोन में भी।
वो वापस भी नहीं कर रहा…
और मैं इंतज़ार की उस आदत से बाहर नहीं आ पा रही।
पर खैर…
क्या ही उम्मीद करूँ अब किसी से?
जब चाहा था उसे पूरे मन से,
तब भी उसका मन मेरे हिस्से में नहीं आया।
आज समझ आ रहा है —
अंतिम सत्य शायद यही है…
कि हमें खुद ही खुद को संभालना होता है।
कोई हाथ हमेशा के लिए थामने नहीं आता,
कुछ लोग बस एहसास सिखाने आते हैं।
दर्द यह नहीं कि उसने कॉल नहीं उठाया,
दर्द यह है कि अब उम्मीद भी धीरे-धीरे मर रही है।
और उम्मीद का मरना
दिल के बहुत अंदर शोर करता है।
पर सुनो…
यह हार नहीं है तुम्हारी।
तुमने प्रेम किया — सच्चा किया।
उसने नहीं किया — यह उसकी सीमा है, तुम्हारी कमी नहीं।
हाँ, अंतिम सत्य यही है —
हमें खुद को ही थामना होता है।
पर इसमें भी एक शक्ति छुपी है।
जब तुम खुद को संभालना सीख जाओगी,
फिर कोई तुम्हें तोड़ नहीं पाएगा।
आज रो लो…
आज मान लो कि बहुत दुख है।
पर खुद से यह वादा मत तोड़ना
कि तुम अपने साथ रहोगी।
तुम अकेली नहीं हो…
तुम अपने साथ हो। 🤍
आज दर्द बहुत ज़्यादा है…
इतना कि शब्द भी साथ छोड़ रहे हैं।
किसे कहूँ?
जिसे चाहा, उसे कह नहीं सकती…
क्योंकि उसका दिल मेरी तरह नहीं धड़कता।
दोस्त हैं…
पर सब अपने-अपने जीवन में व्यस्त हैं,
और मैं नहीं चाहती कि कोई मुझे टूटा हुआ देखे।
अजनबी से दिल खोलूँ?
नहीं…
कुछ दर्द इतने अपने होते हैं
कि उन्हें भीड़ में उघाड़ा नहीं जाता।
तो आज मैं
अपने ही भीतर बैठी हूँ —
सवालों के साथ,
आँसुओं के साथ,
और एक ख़ामोश सी चीख के साथ।
संभल नहीं पा रही…
पर टूटना भी नहीं चाहती।
शायद यही सबसे कठिन पल होता है —
जब रोने के लिए कंधा नहीं,
और चुप रहने की ताकत भी नहीं।
पर सुनो…
यही वो क्षण है
जहाँ इंसान खुद को जन्म देता है दोबारा।
तुम्हारा दर्द तुम्हारी कमज़ोरी नहीं है,
यह इस बात का प्रमाण है कि तुमने सच्चा प्रेम किया है।
आज संभल नहीं पा रही हो…
ठीक है।
हर दिन मज़बूत होना ज़रूरी नहीं होता।
बस एक काम करो —
आज किसी से नहीं,
खुद से बात करो।
अपने दिल पर हाथ रखकर कहो —
“मैं हूँ तुम्हारे साथ।”
कभी-कभी दुनिया साथ नहीं देती,
तब खुद का साथ ही जीवन बचा लेता है। 🤍
बेला....
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