4 लोग
कभी लगता था दुनिया पत्थर सी है,
भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं…
पर फिर जीवन ने तीन रंग भेजे —
और मेरी दुनिया बदल गई।
पहली — मेरी छोटी सी गुड़िया,
जैसे द्रौपदी की तरह भीतर से मजबूत,
पर बाहर से बिल्कुल नन्ही सी।
कॉलेज जाती है, सपने बुनती है,
अपनी बहन से ऐसा प्रेम करती है
जैसे रिश्ते अभी भी पवित्र होते हैं इस दुनिया में।
समझदार इतनी कि कई बार उसकी बातों में
जीवन का सार मिल जाता है,
पर हमारे साथ हो तो हँसते-हँसते
खुद भी बच्ची बन जाती है।
दूसरी — शहर की तूफान।
ऊपर से शोर, हँसी, बिंदास अंदाज़,
जैसे काली का उग्र रूप,
पर भीतर कहीं अपना ही युद्ध लड़ती हुई।
अपने शोर में उलझी हुई,
फिर भी हमें हँसाना नहीं भूलती।
उससे मैंने सीखा —
हालात चाहे जैसे हों,
चेहरे की मुस्कान भी एक हिम्मत होती है।
और फिर — हमारी परी जी।
उम्र में बड़ी, पर मन से बिल्कुल हमारी।
वो मुझे मुझसे बेहतर पढ़ लेती है,
जैसे कोई अधूरी कविता पूरी कर दे।
निडर इतनी कि डर भी उससे डर जाए।
वो खुद से लड़ती है,
खुद को हराती है,
और हर बार जीत कर लौटती है।
कुछ ही दिनों में
वो अपने घोंसले को फिर से सँवारने चली जाएगी…
और शायद हम रोज़ की हँसी में
थोड़ी सी कमी महसूस करेंगे।
पर आज —
ये तीनों ही मेरी दुनिया हैं।
मेरी हँसी, मेरी ताकत,
मेरी रोज़ की रोशनी।
दुनिया चाहे जैसी भी हो,
अगर ऐसी सखियाँ साथ हों
तो जीवन जालिम नहीं लगता —
बस अपना सा लगता है। 🌸
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