तुम अकेले नही हो



मेरी कहानी का एक हिस्सा तुम हो।

और उस हिस्से में ये सच भी शामिल है

कि तुम ठीक नहीं हो।


मैंने तुम्हें कभी टूटा हुआ नहीं देखा,

मैंने बस तुम्ह

हर रोज़ खुद को संभालते हुए देखा है।

वो संभालना

जो बाहर से ताक़त लगता है

और अंदर से थकान।


मुझे पता है

तुमने अकेलापन चुना है।

क्योंकि हर किसी को समझाते-समझाते

एक दिन इंसान

खामोशी चुन लेता है।

ऐसी खामोशी

जहाँ कम से कम

कोई उम्मीद तो नहीं तोड़ता।


पर मैं ये भी जानती हूँ

कि अकेले रहना और

अकेला होना

दो अलग-अलग बातें हैं।

और मैं तुम्हें

अकेला नहीं होने दूँगी।


भले ही मैं तुम्हारी प्रेमिका न बनूँ,

पर एक अच्छी दोस्त बनकर

हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी।

ऐसी दोस्त

जो तुम्हारे बुरे दिनों से डरकर

पीछे नहीं हटेगी।

जो तुम्हारी चुप्पी को

तुमसे ज़्यादा समझेगी।


मुझे तुम्हें बदलने की कोई जल्दी नहीं है।

मुझे तुम्हें ठीक करने का कोई घमंड नहीं है।

मुझे बस

तुम्हारे साथ चलना आता है।


और सुनो—

ओये, सुनो ज़रा।

तुम कितनी भी कोशिश कर लो,

मैं तुम्हें छोड़कर जाने वाली नहीं हूँ।

क्योंकि साथ छोड़ना

मेरी फ़ितरत में नहीं है।


ये मेरा वादा है तुमसे—

मैं हमेशा साथ रहूँगी।

तुम जैसे हो, वैसे ही।

तुम्हारी कमज़ोरियों के साथ,

तुम्हारे डर के साथ,

तुम्हारी खामोशी के साथ।


अगर कभी तुम्हें लगे

कि सब कुछ हाथ से फिसल रहा है,

तो बस इतना याद रखना—

मैं हूँ।

बिना सवाल,

बिना शर्त।


जो होगा,

हम साथ मिलकर देख लेंगे।

रोना पड़े तो भी साथ,

हँसना आए तो भी साथ।

हर मोड़ पर हल नहीं होगा,

पर हर मोड़ पर कोई होगा।


मैं हर बार तुम्हारा सहारा नहीं बनूँगी,

पर हर बार तुम्हारे पास रहूँगी।

कभी आगे चलकर,

कभी साथ-साथ,

और कभी बस

पीछे खड़ी रहकर

तुम्हें गिरने से बचाते हुए।


और आखिर में

बस यही कहना है—

तुम्हें मज़बूत बनने की ज़रूरत नहीं है

हर वक्त।

कभी-कभी

बस किसी का होना ही

काफ़ी होता है।


मैं हूँ साथ तुम्हारे।

आज भी।

कल भी।

जब तक तुम्हें लगे

कि कोई है।


तुम्हारी

आख़री उम्मीद 🐇

तुम्हारी खरगोश


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